Hasit Bhatt  
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Joined 30 August 2016


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Joined 30 August 2016
YESTERDAY AT 0:28

In modern search of love, you will only find two types of candidate, one with unrealistic expectations or one with broken heart.

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25 SEP AT 9:01

(दिल के) टूटे टुकड़े अगर जोड़ भी लूं, दरारें याद दिलाती रहेगी
कर लूं चाहे कुछ भी मगर, (तुम्हे) (उसकी) याद आती रहेगी

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24 SEP AT 12:40

તરી જઈશ હું પણ એવી ખોટી આશા ન દે
ડૂબે છે બીજાંય ઘણા એવા દિલાસા ન દે
લૂંટાયો, ભોળવાયો છું હું જગના જુગારમાં
ઝૂંટવી લે બધું, કાઢી મુક, બીજા પાસા ન દે

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22 SEP AT 12:27

अपनी खुदगर्जी की आज मानो अर्थी लिए जा रहे है
अपने प्यार की लिखी किसी और को पर्ची दिए जा रहे है
आपकी हसी की खातिर मंजूर है यह शिकन की ओढ़नी
कभी तो पूछोगे हमारा हाल, कह देंगे, बस जिए जा रहे है

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22 SEP AT 10:32

जुगनू नहीं होते यहां, दुआ करो अंधेरा कुछ देर बाद हो
ढूंढने निकले थे जो, न मिले न सही, घर पर सुधरे हालात हो
सोने की चिड़िया के ख्वाब देखे उतने पागल नहीं है हम
बस सोचा था इक पंछी हो, थोड़ा कैद, थोड़ा आजाद हो

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18 SEP AT 23:17

બની શકે કે મારી વ્યથાનો જિમ્મેદાર ખુદા ન હોય
રસપ્રદ લખ્યાં દુઃખના પાનાં, ને સ્યાહી જ ખૂટી હોય?

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17 SEP AT 7:25

વાયરાની વાતોમાં વહેતું ગયું ને, હવે વાદળને થાવું ઠરીઠામ
અકળાય, રૂંધાય ને રડી પડે એ, હવે યાદે ચડ્યું છે એને ગામ

ઠંડીમાં ધ્રૂજે ને તડકા માં પરસેવે, અટકે તો કેવું એ કામ,
ઉંમરના આંધણમાં ઝોકાયું આયખું, હવે પોકારે રામનું એ નામ

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13 SEP AT 11:11

बादल की पहली परछाई छूते ही छाता ढूंढ लेते है
नज़र जो टकरा जाए अगर, हम आंखें मूंद लेते है
बारिश या भीगने से कोई परहेज़ है ऐसा तो नही
मन हो छूने का अगर, बूंद तक रास्ता ढूंढ लेते है

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6 SEP AT 15:43

खारे पानी की है मछली, समंदर से उड़ जाए कैसे
हम क्यों है ऐसे खुद नही जानते, समझाए कैसे
हैसियत नही है कि समझे क्या सही है दुनिया के लिए
घड़ी के कांटे को क्यों चलना है भला बताए कैसे

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6 SEP AT 7:08

ન દેશનું ખપે, ન પરદેશનું ખપે,
યાયાવર પક્ષી છું, યાયાવર જ ખપે.

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