Punit Pandey   (पुनीत_पाण्डेय)
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Joined 20 June 2019


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7 AUG AT 13:27

जब चाय कप मे थोड़ी बची होगी,
जज़्बात शर्म तले दबी होगी...

बस नजरें मिला मुस्कुरा देना,
बिन कहे ही बातें सभी होंगी...

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24 MAR AT 19:01

लगा है हुजूम एक आशिक के गली मे,
ये कैसी फुस-फुसाहट है,
ये क्या ताका-झाँकि है।

कहते हैं लोग थोड़ा सबर करो,
अभी तो बस आँखें लड़ी है,
तबाही का मंजर अभी बाकी है।

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17 JAN AT 17:59

सर्दियों की ठिठुरती रात,
बूंदाबांदी बेवज़ह हो रही है।

आज निशा कर दे चाहें घनघोर अँधेरा,
वो मिट्टी से उठी बूँदें मिट्टी में मिल के 'सुबह' हो रही हैं।

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11 DEC 2021 AT 18:04

कितनी दबी थी बातें जज्बातों तले,
लेकिन कुछ कहा ही नहीं...
मोम सा दिल मेरा पिघला तो सही,
लेकिन कमबख्त बहा ही नही...

एक जदोजहद सी उठी भीतर ही भीतर
तेरे जाने के बाद..
तेरा चेहरा, तेरी जुल्फें, तेरी ऑंखें
सिहरा जातीं मुझे बन-बन के याद..

मुझे लगा कि बस चन्द लम्हों की बात है,
लगाना चाहा दिल कंही और,
और लगा ही नहीं...
कितनी दबी थी बातें जज्बातों तले,
लेकिन कुछ कहा ही नहीं...

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8 OCT 2021 AT 16:34

सुनो, चाँद को उसकी जगह दिखानी होगी,
बस तुम्हें माथे पर एक बिंदिया लगानी होगी।

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27 SEP 2021 AT 19:26

इस कदर नाराज़ था मैं,
कि बयाँ भी करूँ तो मैं कैसे करूँ...

मिलते ही लिपट के रो पड़ी वो,
अब ऊँची आवाज़ भी करूँ तो कैसे करूँ...

चलो, आँखों से ही ज़ाहिर कर देता मैं नाराज़गी अपनी,
लेकिन दिखाने को आँखें भी मैं अपने सीने से उसे जुदा करूँ तो कैसे करूँ।

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12 AUG 2021 AT 19:27

मैं प्रेम की परिभाषा तो नही जानता,
लेकिन इतना जानता हूँ..
कि कितनी मुश्किल है बिछड़न,
दो हथेलियाँ जब हौले-हौले विपरीत दिशा में अलग होती हैं,
भौंहे झुकतीं हैं और
होंठ थरथराते हैं,
साँसे मध्म और
और धड़कनें तेज हो जाती हैं।
आँखों से जो पानी बहता है,
वो प्रेम-प्रेम ही कहता है।

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11 JUL 2021 AT 18:22

उसने पूछा,
है कितना सुहाना मौसम,
क्या आती मेरी याद नही...
मैने कहा,
मेरा दिल धड़कनें लेता तेरे नाम की,
तेरी याद किसी मौसम की मोहताज़ नही!

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7 JUL 2021 AT 17:08

यूँ बखूबी उसे इश्क़ मयस्सर करना आता है,
कि आँखों से आँखों में उतर के,
उसे दिल मे घर करना आता है।

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4 JUL 2021 AT 14:34

......

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