Rajni Dhankhar Dangi   (Rajni Dhankhar Dangi)
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Joined 14 August 2020


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Joined 14 August 2020
31 JUL AT 7:43

कैद नहीं रहते...
सपने कभी ...
उन बंद आँखे में...
उडान जो अपने...
हौसलों से भरते हैं।

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27 MAR AT 19:03

सुकून देता है जीना...
कभी अपने लिए भी।
दूसरों को खुश करने में...
अक्सर कदम थक जाते हैं।— % &

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12 FEB AT 8:23

सूरज सी चमक...
वो सुकून शाम सा...
थकते नहीं कुछ कदम...
मीलों सफर के बाद भी।— % &

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5 JAN AT 17:36

बिखर कर...
हर बार ...
वो फिर से ...
जुड़ना जानती है...
औरत है वो...
हर अँधेरे से...
निकलना जानती है।

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24 NOV 2021 AT 10:31

ढूंढना है...
अब उस सवेरे को...
रास्ता जिसका...
फिर कोई अँधेरा...
रोक ना सके।

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1 NOV 2021 AT 6:37

कर दो...
आजाद ...
इन बंद ...
परिंदों को...
कुछ ख्वाब...
अब फिर से...
उड़ने की जिद्द पर हैं।

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17 OCT 2021 AT 18:56

निखरती हैं...
कुछ उम्मीदें बस...
खुली हवा में...
बंद कमरों में ...
अक्सर अँधेरा ...
फैल जाता है।

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12 SEP 2021 AT 8:11

सुलझती नहीं...
कभी कुछ ...
उलझनें...
पर जीने का...
सलीका ...
सीखा जाती हैं।

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22 AUG 2021 AT 18:13

उलझी हुई सी...
इस कहानी में...
सुलझी हुई सी...
शामिल हूँ मैं।

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1 AUG 2021 AT 7:43

जिक्र...
क्यों करना...
अपनी बंदिशों का...
जब ऊपर ...
उड़ान के लिए...
तुम्हारी सोच ही काफी है।

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